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12 December 2007

वतन से दूर अपनी भाषा पढ़ने और लिखने का चाव

अपने घर और देश से दूर अनजाने देश में अनजाने लोगों के बीच अपनी भाषा पढ़ने का चाव आदमी में कैसा होता है यह हमने देखा अपने एक मित्र साजिद खान में। मूलत: भोपाल के निवासी और वर्तमान में दुबई की एक कंप्यूटर एसेसरीज़ फ़र्म में सेल्स एक्जीक्यूटिव की नौकरी कर रहे साजिद पहले समय काटने के लिए ऑनलाईन चैट रूम्ज़ में जाकर मस्ती किया करते थे। हमने जब अपना ब्लॉग बनाया तो इन्हें पढ़ने के लिए लिंक दे दिया। फ़िर कुछ समझ बाद इन्हें नारद, ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत.इन के लिंक भी दे दिए ताकि यह सभी हिंदी ब्लॉग्स को पढ़ सकें। अब आलम यह है कि साज़िद साहब ऑनलाईन चैट रूम्स में शायद ही जाते हैं। जब भी समय मिलता है हिंदी ब्लॉग्स पढ़ने बैठ जाते हैं और कभी-कभी हमसे ब्लॉग्स और उनके मुद्दों पर ऑनलाईन चर्चा करते रहते हैं। साज़िद यह स्वीकारने में हिचकते नही कि ब्लॉग्स पढ़ने से पहले हिंदू-मुस्लिम मामले में उनकी धारणाएं कुछ और थी लेकिन ब्लॉग्स में चलती बहसों और लिखे गए मुद्दों से उनकी धारणाओं में पहले से बहुत सुधार हुआ है। हमारा यह मानना है कि अगर आप पढ़ते रहेंगे तो आपको अपने आप को लिखकर अभिव्यक्त करने का मन होगा ही । और हमारी इसी सोच को साजिद ने सच ठहराते हुए हमें रोमन में लिखकर ब्लॉग में डालने के लिए जो भेजा उसे हल्का संपादित करते हुए हिंदी में लिखकर हमने यहां डाला है। आइए उन्हें शुभकामना दें कि जल्द ही वह अपना एक ब्लॉग भी बनाएं। उन्होनें पहली बार कुछ लिखने की कोशिश की है।


लगी लॉटरी
आज दस दिसंबर है और सरदी जमकर पड़ रही है। सुबह के छह बजे है और मैं उठकर कॉलेज जाने की तैयारी कर रहा हूं। बाबूजी ब्रश कर रहें हैं और मां उनके लिए नाश्ता बना रही है। कंधे पर टॉवेल रखे,मुंह में ब्रश दबाए कुछ गुनगुनाने की कोशिश करते हुए मैने मां से कहा कि मेरे लिए भी नाश्ता तैयार कर देना,आज कॉलेज जरा जल्दी जाना है। तभी बाबूजी मां से कहते हैं " आज इतनी जल्दी उठ कैसे गया यह नालायक, कहीं मैं सपना तो नही देख रहा हूं"। यह सुनकर मां उन्हें जवाब देती है " देखना एक दिन मेरा बेटा हम लोगों का नाम रोशन करेगा"।

मैं मां की बात सुनकर मन ही मन कहते हुए मुस्कुराया कि करेगा नही मां, कर दिखाया है। और फ़िर गुनगुनाते हुए मैं बाथरूम में घुस गया। मैं इतना खुश था गर्म पानी की बजाय ठंडे पानी में ही नहा डाला यह बात मुझे कपड़े बदलते हुए याद आई। कितना खुश होगी प्रीति जब मैं उसे यह खबर सुनाऊंगा। वैसे तो यह बात उसे फोन पर भी बताई जा सकती थी लेकिन मुझे उसकी आंखो की वो खुशी देखनी थी, उसका रिएक्ट करना देखना था। मुझे पता है उसकी खुशी का ठिकाना नही रहेगा। उसके बर्थडे पर जब मैने उसे गिफ़्ट दिया था तो उसका मुंह उतर गया था यहां तक कि उसको कहीं घूमाने भी नही ले गया। उसकी सहेली ने बताया था कि काफ़ी उदास थी प्रीति तब। प्रीति हमेशा बताती है कि उसे बाईक पर घूमने और गोल्ड पहनने का कितना शौक है। मगर मैं उसके लिए यह सब नही कर सकता था।

मैं भी क्या करता, जेब में पैसा होना भी चाहिए इन सब शौकों के लिए। बाबूजी भी बस जेबखर्च इतना सा देते हैं, महीने भर कैसे काम चलाता हूं, मैं ही जानता हूं। अगर ज्यादा पैसे मांगता हूं तो वह कहते हैं "बेटे खुद कमाओ, बाहर की दुनिया देखो, धक्के खाने पड़ेंगे तब पता चलेगी पैसों की कीमत। मां से कभी कोई उम्मीद नही करता वो बेचारी खुद परेशान दिखती है। आज मैं इतना खुश हूं कि यह खुशखबरी प्रीति को ही सबसे पहले देना चाहता हूं और फ़िर मां-बाबूजी को। बाबूजी को बता दूंगा कि मैं क्या चीज हूं।


इतने में बाबूजी की आवाज़ आई "बाहर निकल इतनी देर से क्या कर रहा है बाथरूम में"। बाहर निकला तो मां ने नाश्ता भी रेडी कर लिया था। दो मिनट में नाश्ता किया और अरे हां मैं तो वो खुशखबरी जिसके बारे में सोच सोच कर ही मैं इतना खुश हूं आपको बताना ही भूल गया था, माफ़ करना। अरे भाई हुआ यूं कि कल रात को मुझे एक ई मेल मिला "CONGRATULATION YOU WON UK LOTTERY"। मैने यह देखते ही फटाफट ई मेल खोला, वाह मैं तो $10,0000 जीत गया हूं। उन लोगों ने बैंक अकाऊंट नंबर मांगा था तो मैने मां से पूछकर बाबूजी का अकाऊंट नंबर दे दिया। जल्दी ही वो लोग बाबूजी के बैंक अकाऊंट पे यह पैसा भेज देंगे और मैं लखपति बन जाऊंगा। इसी खुशी में मैं रात भर सोया नहीं और बस प्रीति के सपनों में खोया रहा।

एक बात समझ में नही आई , मैं आखिर यह लॉटरी जीता कैसे, मैने तो कोई टिकट लिया नही, कहीं पार्टिसिपेट किया नही। खैर! अपने को क्या, आता हुआ रूपया क्या बुरा है। अपन तो अब लखपति बनने वाले हैं। शायद ऊपरवाले की कृपा हो गई होगी । वो कहते हैं ना कि उपरवाला जब देता है तो छप्पर फ़ाड़ कर देता है। चलो अब मैं चला। अरे भैय्या प्रीति को खुशखबरी जो देना है न।





18 टिप्पणी:

Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...

बिना विलम्ब इनका ब्लाग बनवाइये। बढिया लिखते है। आपका मार्गदर्शन जो साथ है। संजीत जी पहले रवि जी वाला समाचार पढा और फिर यह वाला। आप निश्चित ही अहम योगदान दे रहे है।

बाल किशन said...

हम भी ऐसे ही आए थे ब्लॉग जगत मे.
इनको भी जल्द ही बुलाइए. अच्छा लिखतें है.

बाल किशन said...

हम भी ऐसे ही आए थे ब्लॉग जगत मे.
इनको भी जल्द ही बुलाइए. अच्छा लिखतें है.

falak said...

Sajid,
Yaar koi tou mila jisney is addiction(chat)ko chor diya. Aur chora bhi tou itney zabardast shauq key liye. Keep it up.

उन्मुक्त said...

अच्छा लिखा है। साजिद ज्लद ही चिट्ठाकारी शुरू करें।

महेंद्र मिश्रा said...

आप अहम योगदान दे रहे है। अच्छा लिखतें है.

parul k said...

sanjeet ne bahuton ko chaating se duur aur chithhajagat se jodaa hai..unme se ek mai bhi huun....sajid ne bahut achacha likha hai,....sanjeet kaa bahut aabhaar

mamta said...

संजीत जी आपके मित्र साजिद बहुत अच्छा लिखते है। बस अब फटाफट उन्हें अपना ब्लॉग बनाकर नियामत रुप से लिखना शुरू कर देना चाहिऐ। । वैसे इस कहानी से तो शुरुआत हो ही चुकी है।

Sanjay said...

साजिद का चिट्ठा जगत में पहले से स्‍वागतझ संजीत आपको साधुवाद.
अब एक राज की बात ... इंटरनैट पर मेरी लॉटरी जीतने की कुल रकम अगर मैं जोड़ दूं तो शायद 10करोड़ डॉलर से कम नहीं निकलेगी.

मीनाक्षी said...

बहुत खूब ! साज़िद और संजीत दोनो को शुभकामनाएँ .

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत बढ़िया लगा, साजिद के बारे में पढ़कर. भाई, ब्लागिंग शुरू करने से बहुत कुछ बदल गया हमारे जीवन में भी..
साजिद जल्दी ही अपना ब्लॉग बनायेंगे और लिखेंगे, ऐसी आशा है.
ऐसी लॉटरी के बारे में सोचते हुए ही कहा गया होगा....बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख.......:-)

Sanjeeva Tiwari said...

स्‍वागत है साजिद भाई का ।

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

आजकल नये और अच्छे लोगों से मिलवाने का यह अच्छा बीड़ा उठाया है।
साजिद जी के नियमित लेखन की प्रतीक्षा रहेगी। और वे यह बतायें कि एक लाख डालर का करेंगे क्या!

Priyankar said...

बिना देरी किए साजिद का ब्लॉग बनवाओ . एक लेखक प्रसुप्त अवस्था में है उसे तुरंत जाग्रत करो .

आभा said...

आप के साथी, आप की ही तरह अच्छा ,बहुत अच्छा.........

anitakumar said...

साजिद जी मुबारक हो आप ने बहुत अच्छा लिखा है। शुरु हो जाइए। संजीत गुरु शुरु हो जाओ क्लास लेनी। एक और सितारा तुम्हारी मदद का इंतजार कर रहा है। मुझे सुर पिक्चर याद आ रही है गुरु।

हर्षवर्धन said...

संजीतजी
आप हिंदी ब्लॉग संसार में लोगों को जोड़ रहे हैं। इसके लिए बधाई और जल्दी से इनका ब्लॉग बनवाइए।

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

" अब आलम यह है कि साज़िद साहब ऑनलाईन चैट रूम्स में शायद ही जाते हैं। जब भी समय मिलता है हिंदी ब्लॉग्स पढ़ने बैठ जाते हैं"

ईश्वर करे कि आप इसी तरह पारखी पाठकों को हिन्दी जालगत में लाते जायें. यदि हम सब इस तरह करने लगें तो जल्दी ही 2000 से 20,000 से 50,000 को छू जायेंगे.

आजकल आवारा बंजारा का अवरण बहुत फब रहा है. अब ऐसा नहीं लगता कि आवरण के निर्माण के समय किसी बंजारे को आवारागर्दी सूझी थी, बल्कि अब वह बंजारा सौंदर्यशास्त्र के हिसाब से सोचने करने लगा है!!

लिखते रहे! हां, इस आवरण को रहने दें, कहीं पुराना वाल खीच ना लायें !!!

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