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09 June 2007

नन्ही सी जान को नोंच खा गए कुत्ते: किस गली जा रहे हैं हम

कल याहू मैसेंजर पर चैटिंग के दौरान जबलपुर निवासी और पेशे से वकील हमारे मित्र
अमन विलियम्स ने हमें जो जानकारी दी उसे सुनकर तो एक पल के लिये हम सन्न से रह गए। उन्होंनें हमें बताया कि जबलपुर के एक इलाके में एक तीन साल की मासूम बच्ची को कुत्ते नोच-नोच कर खा गए। यह बताते वक्त अमन की आवाज़ में एक अफ़सोस झलक रहा था फ़िर उन्होंने ही हमें अपने यहां के समाचार पत्रों की कतरनें स्कैन करवा कर हमें दिखाने के लिए भेजी। जो कि हम यहां चिट्ठे पर ही डाल रहें है।




(बड़ा कर देखने के लिए फोटो पर चटका लगाएं)

एक मासूम बच्ची जिसने अभी दुनिया को देखा समझा और जाना ही नही था उसे ऐसी मौत मिली,क्या हम यह कल्पना कर सकने में सक्षम हैं कि इस बच्ची को अपनी मौत से पहले कितना दर्द उठाना पड़ा होगा,क्या सहा होगा इस मासूम ने। हालांकि समाचार पत्रों मे इस बच्ची के पिता के बयान पर विरोधाभास है पर इस बात पर तो सभी समाचार पत्र एक हैं व फोटो भी दिख ही रहा है कि बच्ची को कुत्तों ने ही नोच खाया है। समाचार पत्रों के मुताबिक यह कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं।
अगर यह कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं और पहले बकरियों या अन्य जानवरों पर हमला भी कर चुके हैं तो क्यों मोहल्ले वालों ने इसे खतरे की घंटी समझ कर नगर निगम को सूचना नहीं दी,इस बात का जवाब भी हमारी एक मित्र ने ही सुझाया कि आजकल लोगों के पास अपने लिए ही समय नहीं है तो फ़िर मोहल्ले की चिंता क्या करेंगे। मतलब यह कि जब तक खतरा अपने घर पर ना नज़र आए तब तक वह खतरा नही सिर्फ़ एक खबर है। हमारी सामूहिकता व सामाजिकता की भावना कहां गायब होती जा रही है,एक समय था कि पूरा मोहल्ला एक घर एक परिवार की तरह होता था पर अब……।

जैसा कि होता है इस मामले को लेकर भी जनाक्रोश के बहाने स्थानीय राजनीति के दांव-पेंच शुरु होंगे पर इस मासूम की ऐसी मौत के लिए किसे दोषी ठहराया जाए। नगर निगम को, उन मोहल्ले वालों को जिन्होंने कुत्तों के आदमखोर हो जाने की सूचना पहले ही नगर निगम में नही दी या फ़िर उस मासूम के लापरवाह पिता को?

भगवान इस नन्ही सी जान की आत्मा को शांति प्रदान करे!!

इस घटना पर हम अफ़सोस जताने के अलावा कुछ नहीं कर सकते लेकिन यही घटना हमें सोचने पर मजबूर भी करती है कि हम क्या बनते जा रहे हैं और हम किस गली जा रहे हैं।

फोटो व खबर उपलब्ध करवाने के लिए मित्र अमन विलियम्स के प्रति आभार।

7 टिप्पणी:

Sanjeeva Tiwari said...

गहरे पानी पैठ . . . सचमुच गंभीर चिंतन है ।
हमारे सामने प्रस्‍तुत करने के लिए आपको व अमन विलिसम्‍स जी को धन्‍यवाद

अनूप शुक्ला said...

अफसोस!

mamta said...

वाकई ये बडे ही अफ़सोस की बात है। पर उससे भी ज्यादा अफ़सोस की बात ये है फिल्म स्टार्स कुत्तों को आजादी से जीने देने के लिए मोर्चा निकाल रहे थे। ये न्यूज़ आज ही हमने टी.वी.पर देखी है।

sunita (shanoo) said...

कुत्तों से भला क्या उम्मीद की जा सकती है वो तो फ़िर भी जानवार है क्या आपने अब तक आदमखोर आदमी नही देखा...दिल तो तब दहल जाता है जब ये देखते और सुनते है की एक आदमी आदमखोर बन गया,...
हाँ मगर उस बच्ची के लिये बेहद अफ़सोस है...

सुनीता(शानू)

Udan Tashtari said...

अफसोसजनक!!

Kumar Rahul said...

This is sad. But I can tell you that this has happened several times in recent times in Mumbai. There is a debate going on, some people requesting the authorities to kill the stray dogs at mass scale. But the ideal solution is to sterilize the dogs on mass scale.

Pushpa said...

Sanjeet ji,

tasweeren wakai aankhon ko nam karne wali hain.agar aap kuch nahi bhi likhte tabhi bhi koi fark nahi padta .aapke mitra ka bahut bahut dhanyawad jinhone ye tasweeren uplabdh karain.

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