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10 August 2009

90 में एक अरबपति, 22 करोड़पति


अमीर धरती कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के गरीब आदिवासियों के लिए यह एक विडंबना ही कही जाएगी किराज्य की विधानसभा में उनके प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे 90 विधायकों में से एक जहां अरबपति है तो 22 करोड़पति है।यह बात संतोषजनक कही जा सकती है कि छत्तीसगढ़ की तीसरी विधानसभा में अधिकांश युवा है और इस विधानसभा में निरक्षर कोई नहीं है।
राष्ट्रीय जनवकालत अध्ययन केंद्र की स्थानीय शाखा ने तीसरी विधानसभा के सदस्यों पर यह विश्लेषणात्मक किताब तैयार की है। संस्था के विजेंद्र कुमार ने बताया किइस बार चुनाव लड़ने वालो में भी ज्यादातर युवा ही थे। उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों की औसत आयु 40 साल से थोड़ी ज्यादा है जबकि चुने गए विधायकों की औसत आयु 48 वर्ष है।सदन में सबसे बुजुर्ग विधायक 79 साल के हैं। 29 फीसदी विधायक 40 साल की उमर के हैं जबकि पिछली विधानसभा में 20 फीसदी विधायक इस उमर के थे। अगर दलीय स्थिति के लिहाज से बात करें तो सत्ताधारी भाजपा के विधायकों की औसत आयु 46 वर्ष है जबकि कांग्रेस के विधायकों की औसत आयु 50 वर्ष से ज्यादा है।


इस किताब में यह जानकारी दी गई है कि चुने गए विधायकों में से सबसे अमीर की घोषित संपत्ति 106 करोड़ रूपए से ज्यादा है जबकि दूसरे सब्से अमीर विधायक की संपत्ति 37 करोड़ है। विधानसभा के इन सदस्यों में से 4 राजनीतिक परिवार, 4 स्थापित व्यापारिक फर्म और 3 बड़े किसान परिवार से हैं। करोड़पतियों की लिस्ट में 7 भाजपा के हैं तो 16 कांग्रेस के। दिलचस्प तथ्य यह है कि राज्य के 32 आदिवासी विधायकों में से 7 और 4 में से 3 अल्पसंख्यक विधायक भी करोड़पतियों में शामिल है।


आगे बताया गया है कि इस विधानसभा में निरक्षर कोई नहीं है। 59 फीसदी विधायकों की न्यूनतम योग्यता स्नातक है वहीं 19 फीसदीसदस्यों को व्यावसायिक शिक्षा हासिल है। जिनमें 5 डॉक्टर, 6 वकील, 1 इंजीनियर और 1 डॉक्ट्रेट की उपाधि वाले हैं।9.5 फीसदी सदस्य ऐसे हैं जो 10वीं से कम पढ़े हैं। आदिवासी विधायकों में भी सभी कम से कम माध्यमिक तक की शिक्षा प्राप्त है और उनमें से 6.3 फीसदी स्नातक या उससे अधिक शिक्षित हैं।



पिछली विधानसभा अर्थात छत्तीसगढ़ की दूसरी विधानसभा के आंकड़े यहां देखे जा सकते हैं। जब 90 में से 84 लखपति थे।


अमीर धरती गरीब लोग वाली बात हम करते हैं। अनिल पुसदकर जी के ब्लॉग का तो नाम ही यही है लेकिन अगर इन विधायकों की संपत्ति पर नजर डालने के बाद क्या कहेंगे?

10 टिप्पणी:

hempandy said...

किताब ने केवल घोषित सम्पति की बात की होगी, अघोषित केवल अनुमान की वस्तु है.अब पांच साल बाद यह संपत्ति जिस अनुपात से बढ़ेगी उसका लेखा रखियेगा.

anuradha srivastav said...

आजकल हर कोई राजनीति में इसीलिये तो आना चाहता है कि सत्ता सुख तो भोगेंगे ही साथ ही आने वाली सात पीढी के लिये भी जुगाड कर देंगें। पहले भले ही साक्षर नेता ना रहें हो पर उनके कुछ जीवन मूल्य थे। नेताऒं की जानकारी में यह नहीं बताया गया की उन पर कितने,किस प्रकार के मुकदमें लम्बित हैं?

Mahesh Sinha said...

करोड़पति तो आज बिखरे पड़े हैं , रायपुर के आसपास के सब किसान करोड़पति हो गए राजधानी बनने के बाद. समाचारों में आज भी टीवी फ्रीज कार को विलासिता की वस्तु बताया जाता है जबकि ये बहुत आम हो गयी हैं .

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

जय हो !
इमानदारी से रोटी खानें और मतदाताओं के दुखदर्द बांटने के लिये इन्‍हें सरकार से जो राशि मिलती है उससे इनकी पेट नहीं भर पाती भाई साहब, क्‍या करें और बड़े फक्र से ये भ्रष्‍टाचार मिटायेंगें गरियाते हैं.

Anil Pusadkar said...

लोग तो गरीब ही है ना। नेता तो उनसे अलग है जभी तो वो अमीर है।

Dr. Mahesh Sinha said...

कांग्रेस तो कहती है अल्पसंख्यक सबसे गरीब हैं यहाँ तो उल्टा दिख रहा है

दिगम्बर नासवा said...

ye to chote se pradesh ka haal hi bataaya hai apne............poore bharat varsh mein shayad hi koi ek bhi MLA ya MP hog jo karorpati na ho....adi koi hai to ginvaa den.....

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

अच्छा आइना दिखाती पोस्ट। राजनीति से अच्छा कैरियर क्या हो सकता है?

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

नेता बने होते तो मजे में रहते। :(

Ruppin said...

umr chahye jitni bhi jo, karm to wesa hi rahega kyunki rajniti profession ka arth hi yahi hai ki- we will rule the region + plus earn money

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