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01 October 2012

मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नाम एक खुला पत्र

इस राजनीति या विसंगति पर क्या कहा जाए कि एक ओर भाजपा रिटेल में एफडीआई का विरोध करते हुए संसद ठप करने से लेकर देश बंद करवा चुकी है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार राज्य में विदेशी निवेश के लिए लालायित है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई दिल्ली में दो दिन रहकर रोड शो कर आए हैं और राज्य स्थापना दिवस के मौके पर नवंबर के पहले सप्ताह में  ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का भी आयोजन किया जा रहा है। भाजपा की इस राजनीति या विसंगति पर छत्तीसगढ़ के किसी अखबार, संपादक या संपादक स्तर के पत्रकार का लिखा हुआ आवारा बंजारा को नहीं दिखा। अगर विदेशी निवेशक यहां निवेश करते हैं तो यहां की प्राकृतिक-खनिज-वन संपदा का क्या होगा, घनघोर औद्योगिकरण का क्या नतीजा होगा,  इस पर चिंता होनी चाहिए। यही चिंता नजर आई स्थानीय सांध्य दैनिक जनदखल के 29 सितंबर के अंक में, जिसमें अखबार के संपादक सनत चतुर्वेदीजी ने मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नाम इन्हीं चिंताओं को जताते हुए एक खुला पत्र लिखा। आवारा बंजारा उस खुले पत्र को यहां साझा कर रहा है। 

मुख्यमंत्री के नाम खुली चिट्ठी
फिरंगियों के लिए आप क्यों बिछाना चाहते हैं लाल कालीन? 
                                           रमन सिंह जी,
लोग कहते हैं अब, आप बदल गए हैं। आपकी सोच बदल गईहै।आपका चेहरा बदल गया है। आपकी रीति-नीति चाल ढाल सब बदल गया है। 2003 जैसा (भोला-भाला) नहीं रहे ‘चांऊर वाले बाबा’ की जो इमेज आपने गढ़ी थी वह भी नहीं रही। गाँव-गरीब के लिए जो दर्द और तड़प आप में थी वह अब दिखाई नहीं दे रही है। बेदाग चेहरे पर कई दाग-धब्बे उभर आए हंै। नि:संदेह, राजनीति काजल की कोठरी है। कैसे भी सयाने हों, कालिख लग ही जाती है। आप पर अगर कालिख लग गई तो अचरज नहीं। अचरज तो इस बात का है कि छत्तीसगढ़ में विकास की नई इबारत लिखने के फेर में आप फिरंगियों का दरवाजा खटखटा रहे हैं। उनके लिए लाल कालीन बिछा रहे हैं। क्यों? उन्हें छत्तीसगढ़ जैसे गरीब राज्य में न्योता देने के लिए आप इतने लालायित क्यों है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं आपके इस उतावलेपन का कारण क्या है? राज क्या है?
आप और आपकी पार्टी रिटेल में एफडीआई का विरोध कर रही है। प्रधानमंत्री से इस्तीफा माँगा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि विदेशी निवेश से खुदरा व्यपार चौपट हो जाएगा। छोटे व्यापारी-कारोबारी तबाह हो जाएंगे। देशभर के व्यापारी संघ रिटेल में एफडीआई के खिलाफ हैं। विदेशी निवेश के खतरों को लेकर लोग उद्वेलित हैं। दूसरी ओर राज्य के मुखिया के बतौर आप विदेशी निवेशकों को न्योता दे रहे हंै। आखिर आप विदेशी निवेशकों को छत्तीसगढ़ का भाग्यनिर्माता क्यों बनाना चाहते हैं? कुछ ही दिन पहले एफडीआई के विरोध पर सफाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा- पैसे पेड़ पर नहीं उगते, उनके इस कथन पर तीखी-मीठी प्रतिक्रियाएं हुईं लेकिन आप और छत्तीसगढ़ के लोग कह सकते हैं, हां, पैसे पेड़ उगते हैं। छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने भरपूर वन संपदा दी है। यहां 44 प्रतिशत वन है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहां बेहतर स्थिति है। यह संपदा कई मायने में बहुमूल्य है। इसकी रक्षा-सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतत: राज्य की है। तेजी से विकास और नई इबारत के लिए क्या इस बहुमूल्य संपदा को नष्ट कर दिया जाए? उदारीकरण और औद्योगिकीकरण के लिए क्या छत्तीसगढ़ को देशी-विदेशी निजी हाथों में सौंप दिया जाए? क्या इस मुद्दे पर चिंतन जरूरी नहीं है? छत्तीसगढ़ के लोग व्यापारी संगठनों की तरह संगठित नहीं है जो खुलकर अपना विरोध करा दर्ज करा सकें। जंगल, पहाड़ और गाँवो में रहने वाली राज्य की आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे या उसके आसपास का जीवन जी रही है। और आप इससे अनजान भी नही हैं। फिरंगियों को यहां न्योता देने के पहले अपने राज्य की जनता को विश्वास में लेना आपने जरूरी क्यों नहीं समझा? आज नहीं तो कल इन सवालों के जवाब आपको देने होंगे।
छत्तीसगढ़ के लोग तब शायद ज्यादा खुश होते जब उन्हें पता चलता कि दो गज जमीन के लिए फिरंगी आपके दरवाजे पर आपके सामने अपनी नाक रगड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री होने के नाते आप छत्तीसगढ़ की नाक हैं। और आप ही उन्हें बुलाने चले गए। क्या कमी है, छत्तीसगढ़ में? सारी दुनिया जानती हैं, यहां अकूत संपदा हेै। जल है, जंगल है, जमीन है और मेहनतकश लोग हैं। इस संपदा पर पहला हक यहां के बाशिदों का है। यह राष्ट्र की, राज्य की संपति है। यह किसी राजनीतिक दल की सरकार की संपदा नहीं है जिसे मनमर्जी से कोई लुटा दे। जब सब कुछ छत्तीसगढ़ के पास हैं, तो उन्हें आने दीजिए जो यहां का विकास चाहते हैं। उदारीकरण ने बंद दरवाजे खोल दिए हैं। इसका अर्थ यह तो नहीं कि विकास के नाम पर संपदा की चाबी फिरंगियों को बुलाकर सौंप दे? उदारीकरण ने विकास के परिभाषा बदल दी है। विकास भी अब मुनाफे का व्यवसाय है। देशी-विदेशी कंपनियां केवल मुनाफे के लिए उद्योग व्यापार का ढाँचा खड़ा करती हैं। ‘वेल फेयर स्टेट’ की अवधारणा हमारी है। संविधान में इसकी व्यवस्था है। इस अवधारणा की रक्षा का दायित्व सरकार का है। आप छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया हैं। इसलिए आपसे उम्मीदें हैं। आप माने या ना मानें, वेल फेयर स्टेट के लिए फिरंगी कंपनियों की जरूरत नहीं है। और फिर सोचना यह भी है, कि क्या छत्तीसढ़ आर्थिक-सामाजिक-शैक्षणिक दृष्टि से इतना सबल हुआ है कि विदेशियों के लिए संपदा के द्वार खोल दें। हम उन्हें अतिथि या महेमान कैसे मान पाएंगे, जब यह जानते हैं कि वे सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए यहां आना चाहेंगे। उदारीकरण अर्थव्यस्था की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसके दुष्परिणामों को भी देश भोग रहा है।  घपले-घोटाले की बाढ़ आ गई है। तेजी से विकास की आकांक्षा बुरी नहीं है पर इसकी आड़ में लूट का व्यापार ना हो। छत्तीसगढ़ छोटा और नया राज्य है। यहां की मूलभूत समस्यों से पहले निपटा जाए। आपसे विनम्र अपेक्षा है, तेजी से विकास की आपाधापी में कहीं छत्तीसगढ़ आधुनिक विकास का ‘कूड़ाघर’ ना बन जाए।  यह न हो। अगर ऐसा हुआ तो लोग तबाह हो जाएंगे। इतिहास आपको माफ नहीं करेगा। अतएव, फिलहाल फिरंगियों से आंखमिचौली ना करें तो ही ठीक रहेगा।
-सनत चतुर्वेदी
30 सितंबर 2012

3 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय said...

अपनी अपनी विवशतायें ।

KrRahul said...

पहली बात तो ये कि विरोधाभाष का आरोप गलत है. भाजपा "FDI इन रिटेल" विरोधी है, न कि दुनिया में हर तरह के विदेशी निवेश की. आखिर हमारे भारत की कम्पनियाँ, कई PSU भी, विदेशों में निवेश करती हैं और ये व्यापार का नियम है. किराना दुकानों में FDI एक बिलकुल अलग मामला है. खेद है आपने ये महत्वपूर्ण बात याद नहीं रखी इस सनसनीखेज पत्र लिखे में.

मुझे नहीं लगता कि इसमें ज्यादा हाय तौबा मचाने की आवश्यकता है क्योंकि ऐसे रोड-shows एवं ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट एक नियमित आयोजन हैं जो हर राज्य या देश करते हैं. छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में निवेश की नितांत आवश्यकता है और क्योंकि देशी कम्पनियाँ सब कुछ नहीं कर सकतीं, विदेशी कंपनियों को आमंत्रण देना कोई गलत नहीं. बस इसे अच्छी तरह "नियंत्रण" (regulation ) में रखना जरुरी है और मुझे आशा है रमण सिंह जी जैसा इमानदार व्यक्ति इस मामले में जरुर अच्छा करेगा.

UMA SHANKER MISHRA said...

राहुल जी मै आपकी बैटन से असहमत हूँ आपके द्वारा दिए गए व्यक्तय में आदरणीय रमण सिंह जी कि पदवी को ध्यान में रख कर दिया गया व्यक्तव्य है आप भेड़ चल कि तरफ अग्रेषित होने की बात कर रहे है किस अर्थ शास्त्र के अनुसार आप विदेशी पूंजी निवेश की बात कर रहे हैं कृपया अपनी मातृत को जीवित रखने वाले उन राष्ट्रों के तरफ देखो ....चीन जापान ...और कई देश है
आज आप आमंत्रण दे रहे हैं कल ये विदेशी यहीं की पूंजी का मुनाफा अपने देश ले जायेंगे और आप को गुलामों की जीविकापार्जन के लिए बाध्य कर देंगे .... मै रमण सिंग की नीतियों का प्रशंशक था ..परन्तु यहाँ मै उनसे सहमत नहीं हूँ ...

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