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31 March 2009

ब्लॉगजगत पर एक और राजनैतिक व्यक्तित्व

इन दिनों लगातार राजनीति और फिल्म जगत से जुड़े या कहें कि सेलिब्रिटिज ब्लॉग जगत में आ रहे हैं

इसी कड़ी में नया नाम जुड़ा है छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे और वर्तमान में रायपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी
भूपेश बघेल का।

कांग्रेस की परंपरा की टिकट वितरण परंपरा को देखें तो नि:संदेह भूपेश युवा ही कहलाएंगे।
वैसे भी उनकी छवि अब तक जूझारू ही रही है।

वर्तमान में वे वर्तमान सांसद रमेश बैस के खिलाफ सक्रियता और निष्क्रियता के मुद्दे को जोर शोर से उठाए हुए हैं।

इससे पहले पिछले साल विधानसभा चुनाव से पूर्व आवारा बंजारा ने ही जानकारी दी थी कि राज्य के पर्यटन और न जाने क्या क्या मंत्री
बृजमोहन अग्रवाल का भी ब्लॉग शुरु हुआ है। हालांकि लोकतांत्रिक पद्धति से चुने गए अग्रवाल जी का ब्लॉग कुछ ही दिन में अलोकतांत्रिक हो गया गया था क्योंकि उनके ब्लॉग पर कमेंट करने की सुविधा ही हटा ली गई थी जो आज तक बंद है। उनके ब्लॉग पर अब बस अपना ही गुणगान नजर आता है, जनता की राय दिखती ही नहीं क्योंकि कमेंट का ऑप्शन ही नहीं है।
जय हो!


खैर!
अपने ब्लॉग में भूपेश जी ने यह लिखा है कि वह रोजाना कम से कम दस मिनट ब्लॉग के लिए निकालने के लिए कोशिश करेंगे।

यदि ऐसा है तो बेहिचक स्वागत है उनका ब्लॉगजगत पर


उनका ब्लॉग यहां देखा जा सकता है

bhupeshbaghel.blogspot.com

कांग्रेस की परंपरा की टिकट वितरण परंपरा को देखें तो नि:संदेह भूपेश युवा ही कहलाएंगे।
वैसे भी उनकी छवि अब तक जूझारू ही रही है।

वर्तमान में वे रायपुर के वर्तमान सांसद रमेश बैस के खिलाफ सक्रियता और निष्क्रियता के मुद्दे को जोर शोर से उठाए हुए हैं।

ब्लॉगजगत पर भूपेश जी का शुभकामनाओं के साथ स्वागत है।

5 टिप्पणी:

राजीव जैन Rajeev Jain said...

rajasthan ki ek MLA bhi hain blog per


http://kiransnm.blogspot.com/

अनूप शुक्ल said...

स्वागत नये लिख्खाड़ों का!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

राजनीतिक लोगों का ब्लाग पर हमेशा स्वागत है। पर उन्हें कुछ अधिक समय देना होगा। उन्हें सीखने के लिए ब्लागजगत में बहुत कुछ है।

Anil Pusadkar said...

अच्छा किया संजीत,भूपेश के ब्लोग के बारे मे बता दिया।अब तो ऐसा लगता है कि सारी बाते तुमसे सीधे करने की बजाय ब्लोग पर ही करनी पड़ेगी,क्यों गलत तो नही कर रहा हूं?

अजित वडनेरकर said...

शुक्रिया संजीत,
ये अनिल पुसदकर जी की भुनभुनाहट कुछ समझ नहीं आ रही है...क्यों खिन्न हैं तपस्वी?

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आपकी राय बहुत ही महत्वपूर्ण है।
अत: टिप्पणी कर अपनी राय से अवगत कराते रहें।
शुक्रिया ।