आइए आवारगी के साथ बंजारापन सर्च करें

06 September 2007

रायपुर का विवेकानंद आश्रम



कल जब हम किताबें जमा करने और फ़िर लाने के लिए लाइब्रेरी जा रहे थे तो दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न इस लाइब्रेरी के बहाने इस संस्था पर ही लिख कर अपने पाठकों और अन्य ब्लॉगर्स से इसका परिचय करवाया जाए।
रायपुर शहर के विवेकानंद आश्रम की इस लाइब्रेरी से हम अपने छुटपन से ही जुड़े हैं, छोटे थे तो बड़े भाई या फ़िर बहन के साथ यहां घूमने जाया करते थे, हाई स्कूल में आकर सदस्य बने तो फ़िर सदस्यता लेप्स होने के बाद भी फ़िर से आज तक सदस्य हैं, देखा जाए तो इस लाइब्रेरी के सदस्य के रुप में जुड़े हमें आज बारह पंद्रह साल होने आ रहे हैं। तो आइए जानते हैं इस संस्था के बारे में जो यह लाइब्रेरी चलाती है।

संस्था का नाम है रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम रायपुर।
छत्तीसगढ़ में रामकृष्ण मिशन की दो शाखाएं है एक तो रायपुर स्थित विवेकानंद आश्रम और दूसरा है नारायणपुर, बस्तर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम।
रायपुर स्थित आश्रम के स्थापना के बारे में मालूम चलता है कि रायपुर में विवेकानंद भावधारा के अनुरागियों ने सर्वप्रथम 1958 में श्री आशुतोष विश्वास नेतृत्व में " श्रीरामकृष्ण सेवा समिति" का गठन किया जिसका कार्यभार कुछ समय बाद स्वामी आत्मानंद जी ने संभाल लिया। स्वामी विवेकानंद ने अपनी किशोरावस्था के दो साल ( 1877-1879) रायपुर में ही गुजारे थे। उनकी इस स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए उनके जन्मशताब्दी वर्ष(1963) में एक पूर्णांग विवेकानंद आश्रम के निर्माण की योजना बनी, 1961 में मध्यप्रदेश सरकार से भूखंड भी मिल गया, भवन बना और संस्था की गतिविधियों को देखकर तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने आश्रम से लगी दो एकड़ जमीन भी आश्रम को दे दी। तो अब यह आश्रम चार एकड़ जमीन पर फ़ैला हुआ है। अप्रेल 1968 में आश्रम चलाने वाली संस्था का रामकृष्ण मिशन, बेलूड़मठ में विलय हो गया तब से यह आश्रम विश्वविख्यात " रामकृष्ण मिशन"(बेलूड़मठ) की एक शाखा के रुप में बहुमुखी सेवाकार्यों में लगी हुई है।

आइए एक नज़र डालते हैं इस आश्रम की गतिविधियों पर

धार्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम
आश्रम परिसर में ही एक सुरम्य मंदिर है जिसमें श्रीरामकृष्ण जी की संगमरमर की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के अंदर जाते ही एक शांति की अनुभूति होने लगती है। हर साल यहां प्रवचन आयोजित किया जाता है । इसके साथ ही 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती " राष्ट्रीय युवा दिवस" पर आश्रम के नेतृत्व में ही शहर भर के स्कूल, कॉलेजों में विभिन्न प्रतियोगिताएं व समारोह का आयोजन किया जाता है।

प्रकाशन विभाग-
श्री रामकृष्ण-विवेकानंद भावधारा तथा विश्व के अन्य महापुरुषों के कल्याणकारी विचारों का प्रचार प्रसार करने के लिए पिछले 35 सालों से विवेक-ज्योति नाम से एक त्रैमासिक पत्रिका निकाली जाती है। जिसे कि भविष्य में मासिक करने की योजना है। इसके अलावा प्रेरक प्रसंग के नाम से भी एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है वह भी लोकप्रिय हो रही है।
पुस्तक क्रय-विक्रय विभाग-
इस विभाग में रामकृष्ण-विवेकानंद, वेदान्त तथा सांस्कृतिक साहित्य हिन्दी, अंग्रेजी तथा बंगला आदि भाषाओं में उपलब्ध है, जबकि क्रय आदेश प्राप्त होने पर अन्य भाषाओं मे भी यह साहित्य मँगाने की व्यवस्था है।

विवेकानंद स्मृति ग्रंथालय
1963 में 300 किताबों से शुरु हुआ यह ग्रंथालय अब 41,000 से भी ज्यादा किताबों को सहेजे हुए है जिसके कि तकरीबन 12-1300 सदस्य हैं। यहां साहित्य से लेकर विभिन्न पाठ्यक्रमों की किताबे उपलब्ध रहती हैं इंजिनियरिंग के स्थानीय छात्रों के लिए तो यह ग्रंथालय जैसे एक वरदान है, इंजिनियरिंग की किताबों के लिए मारामारी मचे होने के कारण इंजिनियरिंग के छात्रों को सीमित संख्या में ही यहां की सदस्या दी जाती है, जब भी उनके लिए सदस्यता फ़ार्म उपलब्ध होते हैं मानों सुबह छह बजे से ही फ़ार्म लेने वालों की लाईन लग जाती है, जबकि सदस्यता मिलनी होती है सिर्फ़ कुछेक को ही!!
नि:शुल्क वाचनालय
ग्रंथालय के साथ ही एक नि:शुल्क वाचनालय भी संलग्न है। इस वाचनालय में 12 दैनिक समाचार पत्र तथा 94 नियतकालीन पत्रिकाएं हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, बंगला तथा अन्य भाषाओं मे आती है। यहां प्रतिदिन औसत उपस्थिति 200 पाठकों की होती है।

विवेकानंद चैरिटेबल पॉलीक्लिनिक (एलोपैथी-होमियोपैथी)

यह दोनो विभाग हफ़्ते में छह दिन तीन घंटे काम करते हैं, इसमें से एलोपैथी के अंतर्गत, दन्त विभाग, नेत्र विभाग,स्त्रीरोग विभाग, शिशुरोग विभाग, लघु शल्योपचार विभाग, अस्थिरोग विभाग, नाक-कान-गला विभाग, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी विभाग, चर्म व गुप्तरोग विभाग, मनोरोग विभाग, एक्स-रे विभाग, पैथोलॉजिकल लैबोरेटरी, फीजियो इलेक्ट्रोथेरेपी विभाग, इन्जेक्शन विभाग और औषधिविभाग हैं। यहां रोगियों से नाम मात्र का ही शुल्क लिया जाता है जो कि इन विभागों की आवश्यकता पर ही खर्च किया जाता है।

विवेकानंद विद्यार्थी भवन (छात्रसेवा)
निर्धन छात्रों को जिन्हें पढ़ने की सुविधा प्राय: नही मिल पाती ऐसे अभावग्रस्त मेधावी छात्रों की सुविधा के लिए एक नि:शुल्क विद्यार्थी भवन की स्थापना इस आश्रम में की गई है यहां विद्यार्थियों को आवास,भोजन,पुस्तकें तथा अन्य उपकरण सब कुछ नि:शुल्क दिए जाते हैं। यहां मेडिकल, इंजिनियरिंग, विज्ञान, वाणिज्य, कला आदि सभी विषयों के छात्र स्थान पाते हैं। वर्तमान में यहां 20 छात्र हैं जबकि दानदाताओं की स्थायी निधि से सात छात्रों के लायक ही खर्च निकल पाता है। आश्रम प्रबंधन यहां मेधावी छात्रों की संख्या पचास करना चाहता है और उनका खर्च चलाने के लिए दानदाताओं की अपेक्षा करता है।

कोचिंग कक्षाएं
आश्रम के आसपास बड़ी संख्या में निर्धन बच्चे निवास करते हैं जिनके पढ़ने लिखने की समुचित व्यवस्था नही हो पाती इसी लिए 1990 से पांचवी से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को आश्रम में नि:शुल्क शिक्षण ( फ़्री कोचिंग) देने की व्यवस्था शुरु की है जिसमें कि फ़िलहाल 125 के आसपास छात्र हैं, इस कार्य में आश्रम को कई अनुभवी शिक्षकों का सहयोग मिल रहा है। आश्रम की योजना छात्र संख्या को दो सौ करने की है।

बालक तथा युवक संघ
हर रविवार की सुबह 9 से 15 साल की आयु वर्ग के छात्रों के लिए विवेकानंद बालक संघ के कार्यक्रम रखे जाते हैं जिसमे। खेलकूद के साथ ही आत्मविकास की शिक्षा दी जाती है जबकि रविवार को ही 16 से 30 साल के युवाओं के लिए व्यक्तित्व विकास और तथा चरित्र -निर्माण की कक्षाएं लगाई जाती है।

आश्रम समय समय पर प्राकृतिक आपदाओं के समय पीड़ितों की सेवा हेतु राहत कार्यों का भी संचालन करता रहता है, खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए कोशिश करता रहता है। इन सबके अलावा आश्रम एक गोशाला भी चलाता है। आश्रम की आवश्यक्ताओं के बाद बचा दूध लागत मूल्य पर विक्रय कर दिया जाता है। इसके साथ ही आश्रम के उद्यान में फूलों तथा शाक-सब्जियों की खेती भी की जाती है जिससे कि आश्रम के मंदिर व भंडार की आवश्यक्ताओं का कुछ अंश पूरा हो जाता है।

इस आश्रम को हम रायपुर शहर का एक गौरव मानते हैं, कम अज़ कम लेखक खुद तो मानता ही है। इस गौरव के कार्यों में हम किस तरह सहभागी बन सकते हैं आइए यह भी देखें--

धनराशि का दान करके।
विवेक ज्योति में विज्ञापन देकर।
ग्रंथालय में पुस्तकें दान देकर।
विवेकानंद चैरिटेबल पॉलीक्लिनिक के विभिन्न विभागों मे उपयोग आने वाले उपकरणों का दान देकर।
विवेकानंद विद्यार्थी भवन के लिए अपने किसी प्रियजन की स्मृति में छात्रवृत्ति की स्थापना कर।
विभिन्न विभागों के लिए फ़र्नीचर, उपकरण आदि जनोपयोगी सामग्री का दान करके!

अधिक जानकारी के लिए निम्न पते पर संपर्क किया जा सकता है--
सचिव रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम, रायपुर-492001( छत्तीसगढ़) फोन- 0771-2544959/2225369/2224119


28 टिप्पणी:

नीरज दीवान said...

नारायणपुर की शाखा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित की जा चुकी है। जानकारीवर्धक लेख. मैंने यहां की लाइब्रेरी का उपयोग नहीं किया क्योंकि रविशंकर यूनीवर्सिटी की लाइब्रेरी से ही काम निकल जाता था।
रामकृष्ण मिशन और पुस्तकों की बात चली तब मुझे बस स्टैंड वाली रामकृष्ण किताब दुकान की याद आ गई है। वहां अकसर आना-जाना लगा रहता था।
इस लेख को विकिपीडिया पर भी डाल दें।

Maulik's Blog said...

bahot badhiya..

Aaj kal library ka use bahot hi kam hota ja raha hai, padhane ki bajah log visuals mein jyada belive karne lage hai aaise samay aaise library students ko kafi help kar sakti hai.

रंजू said...

वाह बहुत ही बढिया जानकारi दी है आपने संजीत जी बहुत अच्छा लगा यह सब पढ़ के लिखते रहे !!

Akhil said...

बहुत अच्छी जानकारी उपलब्ध करवाई आपने भाई। आशा है कि रायपुर के लोग इस जानकारी से बहुत लाभ उठायेंगे।
अगर सम्भव हो तो यह लेख रायपुर के समाचार पत्रों को भी दीजिये। जितने जादा स्थानीय लोग इसे पढेंगे उतना ही अच्छा होगा। नही तो विकिपीडिया पर अवश्य डालियेगा।

Harsh said...

Acha laga bhiaya aap ka naya artical read kar ke... bahut acha

संजय तिवारी said...

संजीत भाई आप स्वभाव से असली पत्रकार हैं. क्योंकि पत्रकार विषय नहीं खोजता उसके आस-पास उसे इतने विषय दिख जाते हैं कि दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
आपका काम सराहनीय है. इसलिए बधाई देकर काम का महत्व छोटा नहीं करूंगा.

जोगलिखी संजय पटेल की said...

संजीत भाई...रायपुर आश्रम का ज़िक्र कर आपने पुण्य का काम किया है. स्वामी आत्मानंद जी से व्यक्तिगत मुलाक़ात रही है. जिस दिन वे रायपुर के लिये रवाना हुए और जीप दुर्घटना में वे श्रीरामकृष्णशरणलीन हुए ..इन्दौर से ही एक प्रवचनमाला का समापन कर निकले थे.बरसाती दिन थे और शायद था श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बेला...आज जब टिप्पणी लिख रहा हूँ तो लग रहा है कि शायद यही दिन रहे होंगे.वैसे उदभट वक्ता अब सुनने को नहीं मिलते.क्या विराट व्यक्तित्व था उनका.मेरे जीवन जो कुछ अच्छा घटा उसका श्रेय बह्मलीन स्वामी जी को ही दूंगा. श्री विवेकानंद आश्रम , विवेक ज्योति और स्वामी आत्मानंदजी ...आपने इस विवरण से ख़ाकसार को यादों के सुखद गलियारों सैर करवा दी. कौन लिखता है आजकल ऐसे विषयों पर...पर हाँ आप लिख तो रहे हैं...दुकानदारों के माहौल में भी ऐसी सात्विका सामग्री का मोल है संजीत भाई.....लिखते रहिये.

Shastri JC Philip said...

संजीत यह लेख पढ कर अच्छा लगा. अब समझ में आया कि मैं ग्वालियर के लिये क्या कर सकता हूं.

-- शास्त्री जे सी फिलिप

मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!

ALOK PURANIK said...

यह लाइब्रेरी देखने के लिए रायपुर आना पड़ेगा।

anitakumar said...

very informative Sanjeet ji ...thanks, for introducing this part of India to us

Udan Tashtari said...

पूरा लेखपढ़ कर और तस्वीरें देखकर बहुत अच्छा लगा. बहुत जानकारी दी, अनेकों आभार. इसे विकिपीडिया पर जरुर डालें.

Sumit Tripathi said...

bahut hi badiya lekh hai..aur isnae meri kuchh purani smritiyon ko taro-taza kar diya. men lagbhag 10 saal library ka sadsya raha aur Ni-shulk vachanalay ka mene kafi upyog kiya..ye meri dincharya me hi shamil tha..ghar se 4 km ki walk karke Ashram jana...1-2 ghante kitaben aur paper padana aur kuchh kitaben library se lekar ghar aa jana..is beech kuchh mitron se bhu mulaqat ho jati thi...shahar ke beechon beech aisi shanti ki kalpana bhi nahi ki ja sakati...aaj mene jeevan me jo kuchh bhi paya hai usme 'Ashram' ki is library ka mahatwapurna yogdaan hai.

yunus said...

संजीत भाई
हमें जबलपुर और सागर शहर के वो पुस्‍तकालय याद आ गये जहां हम नियमित जाते थे । हम में मैं और मेरा छोटा
भाई शामिल है । दिलचस्‍प बात ये थी कि चूंकि हमारी उपलब्‍धता वहीं रहती थी सुबह शाम कुछ घंटे । तो मित्रमंडली
ने भी वहीं आना जाना शुरू कर दिया । और इस तरह से लोगों की लाइब्रेरी की ओर खींचने में थोड़ा बहुत योगदान
हम लोगों ने भी किया । रायपुर की ये लाइब्रेरी चलती रहे बस यही कामना है । और हां चलती रहें ये तमाम गतिविधियां
जिनका जिक्र आपने यहां किया है ।

Gyandutt Pandey said...

विवेक-ज्योति मैं पढ़ा करता हूं. आपने आश्रम से परिचय करा दिया. अच्छा लगा.

Sanjeeva Tiwari said...

धन्‍यवाद, संजीत भाई
बहुत ही उम्‍दा जानकारी दिया है आपने, हम सडक से ही इस आश्रम को देख कर विवेकानंद जी के पावन स्‍मरण कर लेते थे कभी इसके संबंध में जानने की कोशिस नहीं की, हमारे एक परिचित इस आश्रम के ट्रस्‍टी हैं फिर भी हमे उनसे यह क्रमबद्ध जानकारी नहीं मिल पाई थी आपने हमें इस आश्रम के संबंध संपूर्ण जानकारी दी, पुन: धन्‍यवाद ।

अजित said...

संजीतभाई , आपने हमें भी लाइब्रेरी के पुराने दिन याद दिला दिए। बहुत अच्छी जानकारी दी । सिर्फ रायपुर ही नहीं सभी पुस्तकप्रेमियों , विद्यार्थियों ,शोधार्थियों के काम का लेख है। संजय तिवारीजी सही कहते हैं, खरी पत्रकारिता...
आभार

अनूप शुक्ल said...

अच्छा लेख है भाई!

sunita (shanoo) said...

बहुत अच्छा लगा संजीत जी वाकई रायपुर बहुत ही खूबसूरत जगह है...लगता है हमे देखना ही होगा...हर बार आप इतना सुन्दर वर्णन करते है कि देखने की ललक बढ़ती ही जाती है...चित्र भी बेहद सुन्दर है...

सुनीता(शानू)

neeshoo said...

बहुत ही बढिया . बहुत अच्छी जानकारी उपलब्ध करवाई सराहनीय तस्वीरें देखकर बहुत अच्छा लगा .संजीत भाई

Dard Hindustani said...

बहुत ही अच्छी जानकारी दी आपने। हम लोग बचपन मे दूध लेने जाते थे। बाद मे वाद-विवाद प्रतियोगिता के लिये स्कूल की ओर से जाते थे। बीच मे बाबा बनने के चक्कर मे भी भटके पर घर वालो ने रोक ही लिया। सब कुछ याद दिला दिया आपने फिर से।

Prabhat Ranjan said...

Sanjeet ji bahut accha lekh padhne ko mila
dhanywad,
kisliy hum apko batate hai
kahte hai paschim me amtaur per apna des ashramo ka des k rup me jana jata hai lekin ashram k nam par ajkal bahut kuch hote hue v itni vividhtapurn mahaul me samajik utthan me lage rahne wale asramo ki sankhya dukhadrup se bahut he kam hai
aise me ye jankari hame bhut kuch kahti hai..
Kuch vicharne aur kuch karne k liy

anuradha srivastav said...

संजीत आपका लेख क्षेत्रीय लोगों के लिये बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा । वैसे मुझे इस संस्था के द्वारा किये गये कार्यकलाप और समाज सेवा के जज्बे ने हमेशा प्रभावित किया है । उपयोगी लेख के लिये बधाई ।

deepanjali said...

जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

Suresh Chiplunkar said...

बढिया जानकारी, मृत होती जा रही लाइब्रेरियों के इस जमाने में ऐसी लाइब्रेरी सदा जवान रहे और वाचकों की संख्या बढती जाये यही शुभकामना...

Mired Mirage said...

आपके कारण हम सबको रायपुर के बारे में इतना कुछ जानने को मिल रहा है । बहुत बहुत धन्यवाद ।
घुघूती बासूती

Anonymous said...

dear sanjeet, aapka blog aawara banjara dekha, achchha laga. chhattisgarhi parampara ke upar achchha lekh hai. swami vivekanad aashram ke upar lekh achchha laga, dhanyawad

Ashwini kesharwani

nitish said...

dhanyavad mitra,aapne hame bahoot achhi jankari di.Aur iske jariye ham logo ko iske barein me jaankari de sakte hain.Hamare yahan bahoot se log hain jo rahte to raipr me hain lekin iske barein me jante nahi.To ye aapke taraf se achha prayas hai.Ham sadaive aapke is karyakram me bhag leker aapko protsahit karte rahenge.

HARI OM.

deep said...

this is a very good and unique information thank's------------
sandeep keshra,chhotedongar

Post a Comment

आपकी राय बहुत ही महत्वपूर्ण है।
अत: टिप्पणी कर अपनी राय से अवगत कराते रहें।
शुक्रिया ।